बिहार बोर्ड ने शनिवार दोपहर 12 बजे के करीब, 10वीं (Bihar Board 10th Result 2025) का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल 12 लाख से अधिक छात्र पास हुए हैं. इसी बीच, सिकंदरपुर स्थित मुक्तिधाम में संचालित अप्पन पाठशाला की तीन छात्राओं ने फर्स्ट डिवीजन से पास होकर मिसाल कायम की है. बड़ी बात यह है कि ये तीनों अपने परिवार की पहली पीढ़ी हैं जिन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की है. अब इनका सपना इंजीनियर बनने का है. रिजल्ट के बाद तीनों छात्राओं ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी जाहिर की.
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श्मशान से स्कूल तक का सफर
बता दें कि अप्पन पाठशाला की शुरुआत साल 2017 में हुई थी. उस दौरान बहुत कम यहां बच्चे पढ़ने आते थे. लेकिन धीरे-धीरे शिक्षकों के द्वारा जागरूकता फैलाई और बच्चों का आना शुरू हो गया. यहां कक्षा एक से लेकर कक्षा 10वीं तक के बच्चों को फ्री में कोचिंग दी जाती है. इस वर्ष यहां के तीन बच्चे निधि, सलोनी और चांदनी ने मैट्रिक (BSEB Bihar Board 10th Result 2025) की परीक्षा दी थी.
तीनों बच्चे इस परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास हुए. यह तीनों बच्चे स्कूल से आने के बाद पाठशाला में तैयारी करते थे. यह छात्राएं शहर की राधा देवी गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती थी. बिहार बोर्ड (Bihar Board 10th Result) के द्वारा रिजल्ट जारी करने के बाद यहां के बच्चों में काफी खुशी है. वह एक दूसरे को मिठाई खिलाकर ख़ुशी मना रहे हैं.
संघर्ष और सफलता की कहानी
फर्स्ट डिवीजन से पास हुई छात्रा चांदनी कुमारी ने 10वीं (Bihar Board Class 10th Result 2025) की परीक्षा में 500 में से 337 अंक प्राप्त किए है. छात्रा का कहना है कि उसे इंजीनियर बनना है लेकिन उसके घर की स्थिति ठीक नहीं है उनके पिता ऑटो चलाते हैं और उसी में गुजर बसर करते हैं.
वहीं दूसरी छात्रा निधि कुमारी को 500 में से 319 अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है. छात्रा का कहना है कि उसे भी इंजीनियर बनना है. वह प्रतिदिन 4 घंटा सेल्फ स्टडी करती थी. उनके पिताजी एक चाय पत्ती दुकान में काम करते हैं. आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित है. लेकिन पाठशाला से उम्मीद है कि उसे तैयारी कराई जाएगी.
तीसरी छात्रा सलोनी कुमारी को 10वीं (Bihar Board 10th Result) को 500 में से 316 अंक प्राप्त हुआ है. उसे भी इंजीनियर बनना है लेकिन उनके पिताजी सब्जी बेचते हैं उनके घर की स्थिति ठीक नहीं है. वह अप्पन पाठशाला में 7 वर्षों से पढ़ती है. आगे की पढ़ाई को लेकर चिंतित है. लेकिन उसे उम्मीद है कि वह इंजीनियर बनेगी.
शिक्षकों की मेहनत रंग लाई
अप्पन पाठशाला में पढ़ाने वाले शिक्षक सुमित कुमार ने बताया कि पिछले 8 वर्षों से वे इन बच्चों को पढ़ा रहे हैं और इस सफलता से बेहद खुश हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, आगे और भी बड़ी चुनौतियां हैं.
मिठाई बांटकर जाहिर की खुशी
रिजल्ट के बाद छात्राएं बेहद उत्साहित हैं. उन्होंने मिठाई बांटकर अपनी खुशी जाहिर की. हालांकि, अब सबसे बड़ी चुनौती आगे की पढ़ाई की है. सभी छात्राएं इंजीनियर बनना चाहती हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके सपनों के आड़े आ रही है.
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