अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन लोग ले ही लेते हैं. लोन लेते वक्त ये सोचते हैं कि जैसे ही कोई बड़ी राशि का इंतजाम होगा तो इसे पे करके क्लोज कर दूंगा. कई बार EMI बाउंस होने पर पेनॉल्टी लगती है और CIBIL स्कोर पर भी इसका असर पड़ता है. सिबिल स्कोर ठीक रखने, लोन का बोझ खत्म करने के लिए लोग इसे वक्त से पहले पेमेंट कर क्लोज कराने की कोशिश करते हैं. तब भी बैंक उनसे प्री-पेमेंट चार्ज वसूलता है. सुनकर हैरानी हो रही होगी पर ये सच है.
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सरिता ने अपने पैसे किसी फ्रेंड को कर्ज दे दिए. जब सरिता को उनकी जरूरत पड़ी तो फ्रेंड पैसे वापस नहीं कर सकी. मजबूरी में उन्हें पर्सनल लोन लेना पड़ा. उन्होंने कुछ EMI का भुगतान किया ही था कि उनकी फ्रेंड का फोन आ गया. उन्होंने पैसे वापस करने के लिए कहा. सरिता के अकाउंट में कर्ज के पैसे वापस आ गए. अब वे पर्सनल लोन को क्लोज करने के लिए सोचने लगीं. उन्हें लगा कि इस क्लोज कर अनचाहे ब्याज और बैंक से लिए कर्ज के बोझ से मुक्त हो जाएंगी. जब वे क्लोज कराने गईं तो बैंक ने प्री-पेमेंट चार्ज लगा दिया. अब सरिता के लिए ये चौंकाने वाली बात थी.
पर्सनल फाइनेंस की इस सीरीज में हम आपको प्री-पेमेंट चार्ज के बारे में बताने जा रहे हैं. समय से पहले पर्सनल लोन को क्लोज करने के फायदे और नुकसान क्या हैं ये भी बताएंगे.
प्री-पेमेंट चार्ज क्या होता है?
प्री-पेमेंट वह प्रक्रिया है जिसमें कर्ज लेने वाला लोन की अवधि खत्म होने से पहले ही लोन की पूरी या आंशिक राशि चुका देता है. इस पर बैंक या वित्तीय संस्थान एक शुल्क लगाता है, जिसे प्री-पेमेंट पेनल्टी कहा जाता है. यह शुल्क लोन की अवधि के दौरान बैंक द्वारा अर्जित होने वाले ब्याज की भरपाई के लिए लिया जाता है.
प्री-पेमेंट पेनल्टी की दरें
प्री-पेमेंट पेनल्टी लोन की बकाया राशि के 1% से 5% तक हो सकती है. यह दरें अलग-अलग वित्तीय संस्थानों में भिन्न हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, कुछ बैंक पर्सनल लोन पर 2% तक की प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, जबकि कुछ बैंक 5% तक भी ले सकते हैं.
प्री-पेमेंट से पहले जानकारी प्राप्त करें
पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय ही प्री-पेमेंट शुल्क के नियम और शर्तों के बारे में जानकारी लेना बेहद जरूरी है. इससे भविष्य में प्री-पेमेंट करने पर बड़े शुल्क से बचा जा सकता है. इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित करें कि लोन अनुबंध में सभी शर्तें स्पष्ट रूप से हों.
पर्सनल लोन प्री-पेमेंट के फायदे
प्री-पेमेंट करने से उधार लेने वाला वित्तीय बोझ से मुक्त होता है. ब्याज की कुल लागत कम होती है. इसके अलावा, यह क्रेडिट स्कोर में सुधार करने में भी सहायक होता है, जिससे भविष्य में लोन लेना आसान होता है.
आरबीआई का नया प्रस्ताव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक प्रस्ताव जारी किया है, जिसमें व्यक्तियों और माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSEs) द्वारा लिए गए फ्लोटिंग रेट लोन के प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पर कोई शुल्क नहीं लगाने की बात कही गई है. यह कदम उधार लेने वालों को राहत देने वाला कदम है. RBI के प्रस्ताव के मुताबिक लोन समय से पहले चुकाने के लिए किसी भी न्यूनतम लॉक-इन अवधि की शर्त नहीं रखनी चाहिए. प्रस्ताव में ये भी कहा गया है कि बैंक खुद कर्ज लेने वाले से प्री-पेमेंट कराता है तो उसे कोई चार्ज नहीं लेना चाहिए.
निष्कर्ष
पर्सनल लोन का प्री-पेमेंट करने से पहले, कर्ज लेने वालों को संबंधित शुल्क और शर्तों की पूरी जानकारी लेनी चाहिए. आरबीआई के नए प्रस्ताव से प्री-पेमेंट शुल्क में राहत मिल सकती है, लेकिन यह लागू होने के बाद ही प्रभावी होगा. इसलिए, लोन अनुबंध को ध्यान से पढ़ना और बैंक से सभी आवश्यक जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है.
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