छत्तीसगढ़ में एक अजीबो-गरीब मामला सामना आया है. यहां एक पति पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट पहुंच गया. यहां मामले की सुनवाई करते हुए जज ने पति को फटकार लगाई और कहा कि किसी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. ये संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है.
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एक न्यूज एजेंसी और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पति ने पारिवारिक न्यायालय में पत्नी की वर्जिनिटी टेस्ट की मांग की थी. वहां से आवेदन खारिज होने के बाद पति ने हाईकोर्ट में आपराधिक याचिका दायर कर दी. मामले में सुनवाई के दौरान जज अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि पत्नी के वर्जिनिटी टेस्ट की मांग करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है जिसमें महिलाओं के सम्मान का अधिकार शामिल है. ये आदेश 9 जनवरी को पारित हुआ था. इसे हाल में उपलब्ध कराया गया है.
ये है पूरा मामला
इस कपल की शादी 30 अप्रैल, 2023 को हुई थी. शादी के बाद पत्नी अपने ससुराल कोरबा में पति के साथ रहने लगी. याचिकाकर्ता पति के वकील ने बताया कि पत्नी ने कथित तौर पर अपने मायके वालों से बताया कि उसका पति नपुंसक है. पत्नी का आरोप है कि पति फिजिकल रिलेशन नहीं बनाता है. पत्नी ने 2 जुलाई, 2024 को रायगढ़ जिले के पारिवारिक न्यायालय में पति से 20,000 रुपये भरण-पोषण के देने की मांग करते हुए अंतरिम याचिका दायर की.
पति ने याचिका के जवाब में वर्जिनिटी की मांग की
इधर पति ने पत्नी का संबंध देवर से होने का आरोप लगाते हुए याचिका के आरोप के जवाब में वर्जिनिटी की मांग की. इस मांग को पारिवारिक न्यायालय ने खारिज कर दिया. इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की. हाईकोर्ट ने इसके जवाब में कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति देना मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांतों और महिला की प्राइवेसी के खिलाफ होगा.
उच्च अदालत का कहना है कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप गलत हैं तो वह उससे जुड़े मेडिकल टेस्ट करवा सकता है. वो कोई अन्य सबूत पेश कर सकता है. मामले में अपने सबूतों की कमी को पूरा करने के लिए पत्नी का कौमार्य परीक्षण करवाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
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