चंद्रबाबू नायडू और रेवंत रेड्डी के बीच पुराने जमाने की दोस्ती यारी है. कांग्रेस में आने से पहले रेवंत रेड्डी टीडीपी में होते थे और चंद्रबाबू नायडू के बेहद करीबी लोगों में थे लेकिन आगे निकलकर कुछ बनने के लिए कभी-कभी दोस्ती-यारी साइड में रखनी पड़ती है. रेवंत रेड्डी ने भी यही किया. 2017 में टीडीपी से निकल कर कांग्रेस में शामिल होना इतना शुभ रहा कि 5-6 साल के अंदर तेलंगाना के सीएम बनकर रेवंत रेड्डी चंद्रबाबू नायडू की बराबरी पर आ गए. 2023 में रेवंत रेड्डी तेलंगाना के सीएम बने. 2024 में चंद्रबाबू नायडू भी सत्ता में लौट आए. दो तेलुगू राज्यों की कमान गुरु-शिष्य के पास है. राज्य विभाजन के बहुत सारे पेंडिंग मामलों के बाद भी समझदारी से रास्ता निकाल रहे हैं. जून में सीएम बनते ही चंद्रबाबू नायडू ने पहल करते रेवंत रेड्डी से मिलने घर पहुंच गए थे. दो विरोधी छोर की राजनीति करने के बाद भी चंद्रबाबू और रेवंत रेड्डी की बढ़िया केमेस्ट्री चलती रही है. अब कुछ ऐसा हुआ है जिससे मामला बिगड़ने लगा है. अपने-अपने राज्यों की तेलुगू अस्मिता को लेकर आमने-सामने आ गए चंद्रबाबू नायडू और रेवंत रेड्डी.
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT