BJP South Mission: मध्य प्रदेश चुनाव में बीजेपी ने बंपर जीत हासिल की, लेकिन शिवराज सिंह चौहान को न तो जीत का क्रेडिट मिला और न ही मुख्यमंत्री का पद. अब वो एक सामान्य विधायक हैं. प्रदेश में बंपर जीत के बाद ‘दिल्ली नहीं जाऊंगा’ कहने वाले शिवराज की राजनीति में अभी बहुत सस्पेंस भरा है. पिछले दिनों दिल्ली मे बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात में ये तय हुआ कि शिवराज विकसित भारत संकल्प यात्रा में शामिल होंगे. दरअसल विकसित भारत संकल्प यात्रा मोदी सरकार की यात्रा है, जिसका मकसद सरकार की ‘कल्याणकारी योजनाओं’ का पंचायत स्तर पर प्रचार करना है.
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मध्य प्रदेश में किनारे लगने के बाद शिवराज सिंह चौहान ऐसे राज्यों में देखे जा रहे हैं, जहां बीजेपी स्ट्रगल कर रही है. शिवराज एमपी से निकले तो महाराष्ट्र पहुंचे. फिर विकसित भारत संकल्प यात्रा के लिए दक्षिण भारत के तेलंगाना और केरल के दौरे कर रहे हैं.
क्या मिशन साउथ पर है शिवराज?
तेलंगाना, केरल बीजेपी का कोई गढ़ नहीं है, लेकिन हां बीजेपी का फोकस स्टेट जरूर है. पार्टी यहां सालों से अपनी जमीन बनाने के लिए संघर्ष कर रही है. पीएम मोदी ने भी दो हफ्ते में दो बार केरल का दौरा करके सनसनी मचाई हुई है. मोदी के लौटते ही शिवराज मोदी सरकार के विकसित भारत संकल्प यात्रा के साथ केरल के कोट्टयम में दिखे. वैसे शिवराज सबसे पहले आदि शंकराचार्य की जन्मभूमि कालड़ी पहुंचे. कालड़ी का दौरा ऐसे मौके पर हुआ है जब राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर बीजेपी सरकार की शंकराचार्यों से ठनी हुई है.
महाराष्ट्र, तेलंगाना और केरल के दौरों से ये इशारा माना जा रहा है कि, लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान की ड्यूटी तय कर दी है. शिवराज मध्य प्रदेश के सीएम भले न बन पाएं हों लेकिन उनके टैलेंट का इस्तेमाल तेलंगाना, केरल जैसे राज्य में किया जाएगा, जहां बीजेपी का संघर्ष खत्म ही नहीं हो रहा है.
केरल में अपने लिए जगह बनाने में लगी है बीजेपी
दक्षिण में कर्नाटक के बाद बीजेपी को केरल में सबसे ज्यादा संभावना दिख रही है. राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कांग्रेस और लेफ्ट की उलझी दोस्ती-दुश्मनी में बीजेपी को फायदा दिख रहा है. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने केरल में भविष्य के लिए जमीन बनाने के लिए चुनाव लड़ा था. 2019 में बीजेपी ने केरल की 20 में से 15 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था. सीटें तो एक भी नहीं मिली लेकिन बीजेपी का वोट शेयर 13 परसेंट हो गया. करीब 10 सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों को डेढ़ से 3 लाख तक वोट मिले, वहीं दो सीटों पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही. ‘थोड़ा है और थोड़े की जरूरत है’ वाली नीति पर ही मोदी से लेकर शिवराज तक सभी जोर लगा रहे हैं.
‘भारत संकल्प यात्रा’ के सहारे उम्मीद खोज रही बीजेपी
दक्षिण के राज्यों में बीजेपी के लिए संकट भी है और संभावना भी. 2014 और 2019 में प्रचंड मोदी लहर के बाद भी दक्षिण भारत के 5 राज्यों की 129 सीटों पर इसका कोई असर नहीं हुआ. हालांकि बीजेपी ने कर्नाटक में किला फतह किया, लेकिन फिर विधानसभा के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. तेलंगाना में भी एंट्री मारी लेकिन तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल में तो खाता नहीं खुल सका. बहुत मंथन के बाद बीजेपी ने दक्षिण की 129 में से 84 सीटों पर फोकस करने की रणनीति बनाई है. इसी के तहत सरकार के प्रचार के तौर पर विकसित ‘भारत संकल्प यात्रा’ बीजेपी के लिए उम्मीद की बड़ी किरण है, जो पंचायत स्तर तक मोदी की गारंटी को पहुंचा सकती है.
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