सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के स्तनों को पकड़ना, उसका पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अपराध के अंतर्गत नहीं आएगा.
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बता दें कि सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने ये फैसला सुनाते हुए 2 आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं. वहीं 3 आरोपियों के खिलाफ दायर क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी.
न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि "यह एक गंभीर मामला है और फैसला सुनाने वाले न्यायाधीश की ओर से पूरी तरह असंवेदनशीलता है." सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमें यह कहते हुए दुख हो रहा है कि यह फैसले के लेखक की ओर से पूरी तरह असंवेदनशीलता को दर्शाता है." इलाहाबाद उच्च न्यायालय के विवादास्पद फैसले के तीन पैराग्राफ, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है."
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस भेज मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दरअसल, एक दिन पहले मंगलवार को SC ने हाईकोर्ट के फैसले पर खुद सुनवाई करने का फैसला किया था. इस फैसले पर कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और अलग-अलग क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई. हमें यह कहते हुए बहुत दुख है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह कमी थी." कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं है कि जज ने ये टिप्पणियां क्षणिक आवेश में की हों. इससे यह स्पष्ट है कि जज ने मन से विचार करने के बाद आदेश सुनाया है."
सुप्रीम कोर्ट ने पहले कर दिया था इनकार
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि "आदेश सुरक्षित रखा गया था और चार महीने बाद सुनाया गया." कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि यह आदेश समन के चरण में पारित किया गया है. हालांकि, पहले इसी केस पर दायर एक याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था. इस याचिका में जजमेंट के विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई थी. बाद में कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेने के बाद इस पर सुनवाई करते हुए आदेश सुनाया.
क्या है 3 साल पुराना मामला, जिस पर मां ने कराई थी FIR
दरअसल, यूपी के कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई थी. उसने आरोप था लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में देवरानी के घर गई थीं. उसी दिन शाम को अपने घर लौट रही थीं. रास्ते में गांव के रहने वाले पवन, आकाश और अशोक मिल गए.
पवन ने बेटी को अपनी बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही. मां ने उस पर भरोसा करते हुए बाइक पर बैठा दिया, लेकिन रास्ते में पवन और आकाश ने लड़की के प्राइवेट पार्ट को पकड़ लिया. आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी. लड़की की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे. इस पर आरोपियों ने देसी तमंचा दिखाकर दोनों को धमकाया और फरार हो गए थे.
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