वक्फ बिल विवाद: जानें पहले और अब में कितना कुछ बदल गया
News Tak Desk
02 Apr 2025 (अपडेटेड: Apr 2 2025 8:00 PM)
वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्ष लगातार विरोध और बहस कर रहा है. सरकार इसे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश करने जा रही है.
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वक्फ संशोधन बिल को लेकर विपक्ष लगातार विरोध और बहस कर रहा है. सरकार इसे संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश करने जा रही है.


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8 अगस्त 2024 को सबसे पहले संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा इसे लोकसभा में पेश किया गया था और तब से ही विपक्ष इसे लेकर हंगामा कर रही है.
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इस बिल को पहले ही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट के आधार पर मंजूरी मिल चुकी है और अब संसद में पारित होते ही यह वक्फ संशोधन अधिनियम बन जाएगा.


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सरकार का इस बिल को लेकर मानना है कि इसके पारित होने के बाद वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवाद आसानी से सुलझ सकेंगे और मुस्लिम महिलाओं को भी उचित अधिकार मिल सकेंगे.
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वहीं दूसरी ओर विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, AIMIM इसका कड़ा विरोध कर रहे है. उनका कहना है की इस बिल की आड़ में सरकार वक्फ की संपत्तियों को जब्त करने की साजिश कर रहा है.


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वक्फ बोर्ड एक कानूनी इकाई है, जो वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन के लिए जिम्मेदार होता है. वक्फ का अर्थ है ऐसी संपत्ति, जिसे किसी धार्मिक, दान या सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से स्थायी रूप से समर्पित किया गया हो.
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वक्फ अधिनियम के सेक्शन 40 को लेकर सबसे ज्यादा बहस हो रही है क्योंकि इस धारा के तहत वक्फ बोर्ड को "रिजन टू बिलीव " का अधिकार मिल जाता है.


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रिजीन टू बिलीव की वजह से अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई संपत्ति वक्फ की है तो वह अपने स्तर से जांच कर स्वामित्व का दावा कर सकता है.


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सरकार का कहना है कि 2013 में वक्फ अधिनियमों में संशोधन कर वक्फ बोर्ड को अधिक स्वतंत्रता दी गई जिससे कई वक्फ बोर्डों पर माफियाओं का कब्जा हो गया.


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सरकार के अनुसार, इस संशोधित बिल के पास होते ही मुस्लिम महिलाओं और बच्चों को लाभ मिलेगा और किसी भी संवैधानिक अनुच्छेद का उल्लंघन भी नहीं होगा.


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वहीं विपक्ष के बड़े नेता AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर "मुसलमानों के खिलाफ साजिश" करने का आरोप लगाया है.


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इसी कड़ी में कांग्रेस ने इसे "संविधान विरोधी" बताया, जबकि मायावती ने सरकार से "संकीर्ण राजनीति छोड़कर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने" की अपील की. (सभी ग्राफिक्स: अर्पिता यादव.)
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